गोंडवाना का शुभांक 750

गोंडवाना का शुभांक 750

गोंडवाना भूखण्ड का शुभ अंक अर्थात प्रकृति का शुभ अंक सात सौ पचास माना गया है। ऐसा आचार्य मोती रावण कंगाली जी एवं सम्माननीय दादा जी कोमल सिंह मरावी, दादा सुन्देर सिंह जी के साहित्य का अध्ययन करने से ज्ञात होता है। भारत देश में अन्य सम्प्रदायों के लोगों का रहन-सहन, रीति-रिवाज, धर्म-कर्म अलग-अलग पाए जाते हैं। इस्लाम धर्म (मजहब) के भाइयों, मस्जिद, धर्म ध्वजा हरा, धर्म चिन्ह चन्द्रमा और तारा, शुभांक अंक 786; देश में हर धर्म के लोग निवास करते हैं, सभी को अपनी-अपनी पहचान है। ठीक इसी प्रकार गोंडवाना भूखण्ड में तैंतीस सगा पेनों का उद्भव गढ़टूँड़, मूलठोर के योगिक-धातुतत्व के गुण धर्म से हुआ है। कोयतुर गोंडी शब्द कोयतुर देवल प्रतीक वंशतत्व का ही गुणधर्म भौतिक योग भी होता है। एक से 7 सगा घटक तक गोत्रज ज्ञान और आठ से बारह सगा घटक तक भौतिक ज्ञान भी हरेक कुल वंश में ही गढ़ा कुल देव, वंशपेन, सगापेन, स्वबोधित भी हुआ है।

(750) सात-पाँच का योग बना है, घटक पुरकाल जगत का प्रतीक रहा है। शून्य धातु तत्व, पंच तत्व का मेल-मिलाप है। वंश चक्र गतिमान, गतिशील जीवन सत्य की खोज दो मार्गों से हो सकती है—एक पुरुष का मार्ग और एक स्त्री का मार्ग है। (750) सात सौ पचास के योग (जोड़) घटना-गुणा करने से पूरी प्रकृति पंच तत्व समाहित है। 750 अंकों के योग से सगा घटकों का ज्ञान होता है।

कुयवाराष्ट्र के कोयतुर सगा जनों का शुभ मार्ग अंक का…

दर्शन रहा है। शुभांक के विस्तृत वर्णन करने से गोंडवाना की संस्कृति, रीति-नीति का ज्ञान, पेड़-पौधों एवं गण्ड जीवों (मानव) कल्याण की जानकारी प्राप्त होती है।

प्रकृति का शुभांक 750 (JBO)

प्रकृति सदैव दायें से बायें ओर चलती है। जैसे पृथ्वी दायें से बायें घूमने पर दिन और रात ऋतुएँ होती हैं। पेड़ों की बेल भी दायें से बायें घूमते हुए ऊपर की तरफ जाती है। भुजंग पेन (नागा), तड़ास पेन (साँप) भी दायें से बायें गुड़ी मारकर बैठता है। वायु भी दायें-बायें घूमती है, जिसे चक्रवात कहते हैं। संसार के समस्त ग्रह-उपग्रह सभी दायें से बायें सूर्य की परिक्रमा करते हैं। ठीक इसी प्रकार कोयापुनेम का दर्शन भी दायें से बायें चलने का रहा है। जब हम अंकों को पढ़ते हैं तो सबसे पहले इकाई, दहाई, सैकड़ा, हजार, दस हजार से गणित की पढ़ाई होती है।



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